Published: March 11, 2022
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यह बात बहुत से सज्जनों को भी बुरी लग सकती है, आप प्रेम से अपनत्वपूर्वक ग्रहण कीजिए। कई महीनों से लिखने को थे किंतु पहले स्वयं इस दर्शन की व्यवहार सिद्धि का अनुभव किया। #शिखा में अग्नि का तेज़ प्रतिष्ठित होता है। सिर पर #चोटी रखने की मानव शरीर में विशेष महत्वता है।

बालों के बारे में शास्त्रों में कई स्थान पर वर्णन मिलता है। टोना-टोटका बालों से ही होता है, वैज्ञानिक भी एक #बाल की डीएनए जाँच से व्यक्ति की संपूर्ण जानकारी निकाल लेते हैं।

आज पुरूषों पर शिखा देखनी दुर्लभ है किंतु स्त्रियों ने बनाना छोड़ दिया है। पुरुषों का चोटी न रखने और स्त्रियों का चोटी न बनाने के कारण में बहुत अंतर है। एक परंपरा खंडित होने के शिकार हैं तो दूसरे काम-वासना के। सरलता से जिसका निवारण हो, उसे तत्काल ही कर लेना चाहिए।

साधारण सा नियम है या तो बाल बिलकुल छोटे रखें या लंबे हों तो चोटी अवश्य बनाएँ । चोटी नहीं रखने का अर्थ है बिना हेलमेट/बिना सीटबेल्ट गाड़ी चलाना। दुर्घटना होने पर आप ही उत्तरदायी होंगे। शमशान घाट में जाने पर या सामने से निकलने पर स्त्री के बालों में ही फँसकर आत्माएँ आ जाती हैं।

गंतव्यमूलक संगविहीन दुर्बलता के कारण कुमारी कन्या के बालों पर असुर, विधर्मी, प्रेत की दृष्टि पड़ने का अधिक भय रहता है। इसी कारण से सिर ढकने को कहा जाता है। प्राय: व्यक्तियों को यह भ्रम है कि भूत-पिसाच के पकड़ने पर हम अपना आपा खो देंगे।

शास्त्रों में ज्वरादि रोगों को भी इन्हीं का कार्य बताया गया है। हर प्रेत इतना शक्तिशाली नहीं होता जो आपको वश में कर ले। जीवन में स्वच्छता न होने पर संभावना है कि किसी-न-किसी रूप में अस्थाई प्रेत आपसे चिपका हुआ हो। यदि पूर्ण नग्नावस्था में स्नान करते हैं तो भी प्रेत चिपक सकता है।

मानसिक तनाव, सिर में दर्द, बुखार, अन्य शारीरिक रोग हो सकते हैं- आत्मशक्ति पर निर्भर करता है। जठराग्नि में जलकर, मल आदि स्थानों में निवास करके वे अपने नर्क भोगते हैं और आप अपनी मर्यादा भंग करने का फल।

आज केश खुले रखने के कारण स्त्रियाँ निराश, मानसिक रूप से विचलित, पीड़ित और व्यथित रहती हैं। बाल खोलने के बाद तेज़ तो वैसे ही नष्ट हो जाता है। कुछ अनुचित घटित होने पर प्रतिकार की क्षमता नहीं रहती क्योंकि मूलभूत गलती आपकी थी।

केश अति पवित्र और शक्तिशाली होते हैं यदि शीर्ष पर विधिवत प्रतिष्ठित (चोटी के रूप में) हों। शनिचर बालों के सहारे से ही जीवन में आता है, चांडाल छाया भी बालों से ही चढ़ती है। बालों को सुरक्षित रखें।

जिस दिन आपको अपने बालों की शक्ति का ज्ञात हो गया उस दिन आप चोटी बनाने लगेंगे और स्वत: ही सिर भी ढकने लगेंगे। खुले बालों में पूजा निरर्थक हो जाती है, देवी-देवता हविष्य स्वीकार नहीं करते, सूर्यदेवता को जल अर्पित करना बेकार, सारे धर्म-कर्म व्यर्थ।

पुरुष हैं तो धीरे-धीरे बाल बढ़ाकर शिखा रखिए, स्त्री हैं तो आज से ही चोटी बनाने लगिए। आपके पास संसाधन होने के बाद भी लाभ नहीं लिया जा रहा है। स्वर्गालक्ष्मी द्रौपदीजी के लिए दुर्योधन द्वारा किए वस्त्र हरण से बड़ी बात दुःशासन द्वारा खींचकर उनके केशों को खोलना थी।

इसलिए उन्होंने दुःशासन के रक्त से अपने बालों को सींचने का संकल्प लिया। फला व्यक्ति विवाद करते हैं कि स्त्रियाँ सिर ढकती थीं या नहीं। यह छोड़िए, बालों की चोटी बनाना तो निर्विवाद है न। उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम।

आज स्तर देखिए, नगरों में कन्याओं-स्त्रियों ने चोटी का सर्वथा परित्याग कर दिया है। रानी पद्मावती (कंस की माता) केश खुले होने के कारण दुर्मील राक्षस को श्राप नहीं दे पाईं क्योंकि किसी पराए पुरुष के सामने केश खुलते ही सतीत्व भंग हो जाता है।

बाल खुलते ही अन्य अनाचार और आगामी दुष्परिणाम आना स्वाभाविक हैं। सिर ढकना बहुत दूर की बात है, कम-से-कम बालों को तो अपने नियंत्रण में रखें। उचित काल में, उचित अवस्था में, उचित व्यक्ति के समक्ष बाल खोलना उचित परिणाम देते हैं।

प्रश्न आता है किस प्रकार से चोटी बनाएँ ? पुरुषों के लिए शिखा में भिन्न प्रकार की गांठों का विधान है और स्त्रियों के लिए गुथ वाली चोटी ही सर्वोत्कृष्ट है। बिना गांठ और गुथ के चोटी रखना मन बहलाने वाली बात है।

इस मर्यादा का पालन करने पर मातृशक्ति पर कोई अनुचित प्रहार नहीं करेगा। स्वास्थ और शील की रक्षा निसंदेह होगी। ।। जय उमापति ।। ।। जय माता सती रुद्रेश्वरी ।।

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