जब घर बन कर तैयार हो जाए और तोड़ना कठिन हो तब वास्तु में निवारण ही आपकी सहायता करेगा 🧵 वास्तु दोष आ जाए तो पढ़िये वास्तु निवारण
यदि घर का उत्तर वायव्य हिस्सा ऊँचा होता है या वहाँ पर गड्ढे रहते हैं अथवा वह ढंका रहता है, तो ऐसा घर गृह स्वामी से छिन जाता है। यदि घर के आग्नेय तथा वायव्य कोण बढ़े हुए होते हैं, तो घर में आग लगने की आंशका अधिक बढ़ जाती है। वायव्य कोण में शौचालय बना देने से परिवार के सदस्यों
रसोईघर की दीवार टेढी-मेढी या टूटी- फूटी होने पर गृष्ट स्यामिनी का जीवन संघर्षपूर्ण हो जाता है। 🔷🔷निवारण उपाय 🔷🔷 घर के मुख्य द्वार पर, सब प्रकार के विघ्नों के विनाशक श्रीगणपतिजी की मूर्ति स्थापित करें। प्रतिदिन स्नान के पश्चात् ॐ गं गणपतये नमः का एक माला जप नियमपूर्वक करें।
भूमि दोष या अन्य ग्रह दोषों के कारण भी व्यक्ति का सुख प्रभावित होता है। आइए उन कारणों की समीक्षा करें तथा उन्हें दूर करने का समुचित प्रयत्न करें। प्रस्तुत लेख में चारों मुख्य दिशाओं तथा कोण दिशाओं के संबंध में वास्तु दोष तथा उनके निवारण के उपाय बताए गए हैं 🔷 पूर्व दिशा
∎ निर्माण कराते समय घर का ईशान भाग बैंक देने से प्रगति में अनेक बाधाएँ, आती हैं। ईशान में कूड़ा-करकट तथा रेत, सीमेंट आदि का ढेर होने पर संतति में कुसंस्कारों के उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है। ईशान में रसोईघर का निर्माण कराने से धन के संचय में बाधा आती है तथा घर में शांति
पुराणों में पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण कहे गए हैं. तथा इसका प्रतिनिधि ग्रह शनि है। उत्तर दिशा के चबूतरे घर के केन्द्र स्थान से अधिक ऊँचे बना देने पर, घर का खर्च अत्यधिक बढ़ जाता है। संबंधित तथ्य : यदि पश्चिम भाग घर के पूर्व भाग की अपेक्षा नीचा हो, तो गृह स्वामी को अपयश एवं
यदि घर के दक्षिणी भाग में पुस्तकालय या पढ़ाई के लिए स्थान नियत किया गया है तो वहाँ पढ़ने में मन नहीं लगेगा। यदि दक्षिणी भाग में अधिक खाली जगह छोड़ दी गई है, तो घर की स्त्रियाँ शारीरिक तथा मानसिक रूप से पीड़ित रहती हैं। दक्षिणी भाग के कक्षों के द्वार नैऋत्यमुखी बना देने से

