प्राचीन भारतीय ग्रंथों में यक्ष किन्हें कहा गया है?🧵 🔹 रहस्यमयी शक्तियों के स्वामी 🔹 दैवीय शक्तिया
शक्ति सदैव पूज्य है, चाहे जैसी भी हो- धन बल, जन बल, राज बल, ज्ञान बल, शारीरिक बल इत्यादि। इनमें से सबसे प्रभावी धन बल है। जहां धन होगा, वहां बाकी शक्तियां एकत्रित की जा सकती हैं। जिन देवी-देवताओं के लोक भिन्न-भिन्न स्थानों पर स्थित हैं, उनकी साधना में सफलता पाने के लिए साधक को
यक्ष और यक्षिणियों का संक्षिप्त पौराणिक परिचय 🔹 उत्पत्ति और प्रकृति यक्ष एक प्राचीन, अर्धदैविक प्रजाति हैं जिन्हें पश्चिमी देशों में “Ancient Aliens” जैसा माना जाता है। ये देवताओं से नीच किंतु मनुष्यों से अधिक शक्तिशाली होते हैं। यक्षों की उत्पत्ति ब्रह्मा द्वारा जल की रक्षा
साधना और सिद्धियाँ यक्षिणियों की सिद्धि से साधक को धन, ऐश्वर्य, आकर्षण, अदृश्यता, भविष्यदर्शिता आदि शक्ति प्राप्त होती है। परंतु इन्हें सिद्ध करने से पहले कुबेर की कृपा आवश्यक मानी जाती है। ⚠️ पिशाचिनी यक्षिणियाँ कुछ यक्षिणियाँ तामसिक प्रवृत्ति की होती हैं जिन्हें पिशाचिनी
यक्षिणियों का निवास मुख्यतः अशोक के वृक्षों के आसपास होता है। 36 प्रमुख यक्षिणियों में से 8 को “अष्ट यक्षिणी” कहा जाता है, जो वरदान और श्राप देने में सक्षम हैं। यक्षिणियों की साधना के लिए कुबेर की कृपा आवश्यक मानी जाती है। यक्षिणियों की पहचान बुरी प्रवृत्तियों के साथ भी की
जिस तरह प्रमुख 33 देवता होते हैं, उसी तरह 64 यक्ष और यक्षिणियां भी होते हैं। सभी के रहने के लिए विभिन्न लोक है जैसे देवताओं का देवलोक राक्षसो का पाताल लोक पितृ का पितृलोक इसी प्रकार यक्षलोक हमारे बहुत समीप है किसी सुपात्र को यदि सदगुरु मिल जाये तो थोड़े प्रयास ही इन्हें प्रसन्न



