समझ नहीं आता कि कुछ लोग यह क्यों चाहते हैं कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक भारत में होने वाले चुनावों में मतदान करें ? याद है न हाल ही में अमेरिका ने अपने देश में चोरी से घुसे 15 देशों के अवैध नागरिकों को बेड़ियां पहनाकर उनके मूल देशों में डिपोर्ट किया था ? भारत में भी ऐसे
अमेरिका से जब अवैध घुसपैठियों को निकाला जा रहा था तो भारत की रुदालियों ने तब भी शोक गीत गए थे कि हाय हाय , हमारे भगोड़ों को चोरों की तरह वापस भेज दिया। ठीक इसी तरह अब भारत जब दिल्ली से असम तक अवैध रूप से आ घुसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेज रहा है , तो देश में
चुनाव आयोग उनका पता लगा रहा है तो 56 साल तथा 42 साल के बहु प्रचारित " दो लड़के " हाहाकारी धुन बजा रहे हैं। राहुल तेजस्वी की जोड़ी के दुख का कारण यह है कि इन विदेशी वोटरों में 97% मुस्लिम वोटर हैं जो शर्तिया “दो लड़कों” की पार्टियों को वोट देते हैं। उनके नाम कट जाएंगे तो वोट
क्या विदेशी भगोड़े हमारे लोकतांत्रिक भविष्य निर्धारण में भागीदार हो सकते हैं ? यदि नहीं तो सोलर लाइट के सस्ते जमाने में क्यों लालटेन और केरोसिन उठाए घूम रहे हैं ? मांग करें कि भारत की जनतांत्रिक व्यवस्था में भारत के नागरिक ही वोट डालें। फिर किसी की भी सत्ता आए , सब उन्हें सलाम
भारत में 1971 के युद्ध के दौरान लाखों शरणार्थी पाकिस्तान के जुल्मों से बचने के लिए भारत आए थे। बांग्लादेश बनने के बाद उन्होंने अपने रिश्तेदारों को वापस बुला लिया। धीरे धीरे रोहिंग्या भी आ गए और भारत भगोड़े घुसपैठियों की धर्मशाला बन गया। ये सब फर्जी वोट बनकर तमाम राज्यों में फैल

