आतंकवाद पर प्रहार.. भारतीय सेना का एक और “सर्जिकल स्ट्राईक” 11 जुलाई की रात क्या हुआ, ये कोई खुलकर नहीं कह रहा, पर असम के आतंकी संगठन उल्फा का दावा है कि भारत ने म्यांमार की सीमा पार घुसकर ड्रोन से सर्जिकल स्ट्राइक किया है। आतंकियों का कहना है कि इस हमले में उनके बड़े कमांडर
उल्फा ने तो ये भी कहा कि जब नयन असम का अंतिम संस्कार हो रहा था, उसी दौरान एक और मिसाइल हमला हुआ जिसमें उनके दो और सीनियर कमांडर मारे गए। इतने बड़े दावे के बावजूद भारत की ओर से अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। सेना ने न तो इन दावों को स्वीकारा और न ही खंडन किया, बस इतना कहा कि ऐसी
म्यांमार में उल्फा का बेस लंबे समय से चीन की मदद से चल रहा है। चीन ने इन्हें पैसा, हथियार और ट्रेनिंग दी है ताकि भारत के पूर्वोत्तर को अशांत किया जा सके। ये वही चीन है जो पाकिस्तान के ज़रिए कश्मीर में आतंकियों को भेजता है और अब म्यांमार के ज़रिए उल्फा जैसे संगठनों को ज़िंदा रखता
पिछले वर्षों में भारत म्यांमार के अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों पर हमले कर चुका है, जैसे ऑपरेशन सनराइज। इस बार भी अगर हमला हुआ है तो भारत ने फिर दिखा दिया है कि आतंकियों को उनकी मांद में जाकर मारने से अब वो पीछे नहीं हटेगा। कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, कोई भाषण नहीं, सीधा प्रहार, और
भारत की ये चुप्पी भी एक बयान है – कि जो करना था, कर दिया गया। अब बोलने की ज़रूरत नहीं। जिस तरह उल्फा के सबसे बड़े आतंकी एक-एक कर खत्म हो रहे हैं, उससे साफ है कि भारत अब पूर्वोत्तर में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त करने वाला नहीं। चीन और पाकिस्तान दोनों समझ लें, ये 1962 का
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