नवाब मलिक ने बिल्कुल सच बोला कि शिवसेना का जन्म हिंदुत्व के लिए नहीं हुआ था और ना ही शिवसेना कभी हिंदुत्ववादी रही। दरअसल शिवसेना को इंदिरा गांधी ने बनाया था। इंदिरा गांधी के समय में मुंबई ट्रेड यूनियन, मजदूर नेताओं और हड़ताल कराने वालों का गढ़ बन गया था। शंकर गुहा नियोगी से
उसी जमाने में पानी वाली बाई के नाम से मशहूर मृणाल गोरे ने जो पानी को लेकर आंदोलन किया था उसे आजाद भारत का महिलाओं द्वारा किया गया सबसे बड़ा आंदोलन कहते हैं। लाखों की संख्या में महिलाएं घरों से निकलकर सड़क पर प्रदर्शन की थी। तब इंदिरा गांधी को लगा कि हड़ताल से निपटने का सबसे
इंदिरा गांधी ने बाल ठाकरे को बढ़ावा दिया और बाल ठाकरे ने इंदिरा गांधी के साथ मिलकर बड़ी चालाकी से मुंबई की एकता को तोड़ने का काम किया। बाल ठाकरे ने सबसे पहला आंदोलन दक्षिण भारतीयों खासकर शेट्टी लोगों के खिलाफ किया। उन्होंने नारा दिया बजाओ पुंगी भगाओ लूंगी। यानी मुंबई में
बाल ठाकरे ने एक साथ सभी बाहरी लोगों पर हमला नहीं बोला क्योंकि उन्हें पता था यदि वह एक साथ सब पर हमला बोलेंगे, इकट्ठे होकर जवाब देंगे, इसीलिए इंदिरा गांधी की सलाह पर बारी बारी से एक एक के खिलाफ हमला किया गया। यहां तक कि जब इंदिरा गांधी ने भारत में इमरजेंसी लगाई थी उस वक्त बाल
इंदिरा गांधी की शह पर शिवसैनिकों को तहबाजारी वसूली, ठेले वालों से वसूली, टेंपो वालों से वसूली और अपना यूनियन बनाकर बड़े बड़े उद्योगपतियों से वसूली का चस्का लग गया था। इसलिए उन्होंने अपना काम चालू रखा और बाद में थोड़े समय के लिए इन्होंने हिंदूवादी का चोला जरूर ओढ़ा था। और पैसे

