"अच्छा मुसुरमान" ??.. 2016 की बात है हमें सर्दी हो गई। इलाज हेतु होम्योपैथी डॉ का चुनाव किया। डॉ बहुत ही मशहूर व कम फीस लेते थे। कार वालो से लेकर पैदल वाले तक उनसे इलाज करवाने आते। हफ्ते में बस एक दिन 9 से 11 दो घण्टों के लिए क्लिनिक खुलता अतः क्लिनिक पर मरीजों का जमावड़ा लगा
फ़ोन से अपॉइंटमेंट का सिस्टम नही था कार्ड जमा कराकर नम्बर लगाने की व्यवस्था थी। लोग सुबह 7 बजे से ही आ जाते हमनें भी वही समय चुना। सुबह 7 बजे से आकर नम्बर लगाकर 2 घण्टे मरीजो के साथ गपशप कर टाइमपास करते। डॉ को दिखाकर काम पर निकल जाते। हमारे ही टाइम पर एक मुसुरमान मरीज भी आता
एक दिन उस मुसुरमान ने कहा, मोदी सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना अच्छी है बदलाव आया है। इतना सुनते ही वहां खड़े हिंणु मरीज खुश हो गए। आखिर एक मुसुरमान मोदी की तारीफ कर रहा था। ऐसे ही एक दिन उसने कहा, मोदी सरकार अच्छा काम कर रही है। मुसुरमानो को "गुजरात दंगा भूलकर" मोदी सरकार का
हम उसकी चतुरता, अलतकिय्या पर मन ही मन मुस्कुराए कि कितनी सरलता से इसने गुजरात दंगों के लिए मुसुरमान को विक्टिम और मोदी, हिंणु को दोषी ठहरा दिया और खुद अच्छा मुसुरमान भी बन गया। हम समझ चुके थे कि सामने वाला माहिर खिलाड़ी है। इसलिए उसका असली चेहरा मासूम हिंणुओ के सामने लाने के
हमनें सिमी, इंडियन मुजाहिदीन, अलकायदा के नाम गिनाए तो उसने पाकिस्तानी संगठन लश्कर, जैश गिना दिए। वहां खड़े हिंणुओ की छाती में उसके लिए दूध उतर आया। वे भावविह्वल हो उठे। हम दोनों अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन गिनाते रहे। तभी हमने मौका देखकर ट्रिगर पॉइंट दबा दिया। 'हमास' को आतंकवादी
हमनें उन्हें संयुक्त राष्ट्र से लेकर तमाम साक्ष्य दिए लेकिन वे नही माने। उनकी नजर में हमास आतंकी संगठन नही बल्कि इंसानियत की लड़ाई लड़ने वाला मजभी संगठन था। वे भड़ककर उठकर चले गए। हमनें मुस्कुराते हुए वहाँ खड़े लहालोट हिंणुओ की तरफ देखा उनके चेहरे उतर चुके थे। उसके बाद उस "अच्छे

